दोहे

सुबह सवेरे जागिए, जब जागे हैं भोर ।
समय अमृतवेला मानिए, जिसके लाभ न थोर ।।

जब पुरवाही बह रही, शीतल मंद सुगंध ।
निश्चित ही अनमोल है, रहिए ना मतिमंद ।।

शिक्षक दिवस पर कुछ दोहे

शिक्षक से जब राष्ट्रपति, हुये व्यक्ति जब देश।
तब से यह शिक्षक दिवस, मना रहा है देश ।

कैसे यह शिक्षक दिवस, यह नेताओं का खेल ।
किस शिक्षक के नाम पर, शिक्षक दिवस सुमेल ।।

प्रेम के दोहे

दुनिया की यह रीत है, होते सबको प्रीत ।
समझे जिसको हार तू, होती तेरी जीत ।।

प्रिये तुझे मैं क्या दूॅ , नित नूतन उपहार ।
सौंप दिया मैं तो तुझे, निज जीवन पतवार ।।