अतुकांत कविता- मैं एक अदना सा प्रायवेट स्‍कूल का टीचर

मेरे बचपन का मित्र
जो मेरे साथ पढ़ता था
आठवी भी नहीं पढ़ पाया
आज राजमिस्त्री होकर
चार सौ दैनिक कमा लेता है
और इतने ही दिनों में
मैं एम.ए.डिग्री माथे पर चिपका कर
महिने में पाँच हजार कमा पाता हूँ ।