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पंच दिवसीय दीपपर्व की छंदमय शुभकामनाऍं

धनतेरस पर्व की शुभकामना-

पंच दिवसीय दीपपर्व की छंदमय शुभकामनाऍं
पंच दिवसीय दीपपर्व की छंदमय शुभकामनाऍं

आयुश प्रभु धनवंतरी (कुण्‍डलियां छंद)-

आयुष प्रभु धनवंतरी, हमें दीजिए स्वास्थ्य  ।
 आज जन्मदिन आपका,   दिवस परम परमार्थ ।।
 दिवस परम परमार्थ,  पर्व यह धनतेरस का ।
 असली धन स्वास्थ्य, दीजिए वर सेहत का ।।
 धन से बड़ा "रमेश", स्वास्थ्य पावन पीयुष ।
 आयुर्वेद का पर्व, आज बांटे हैं आयुष ।।

नरकचतुर्दशी की शुभकामना-

शक्ति-भक्ति प्रभु हमें दीजिये (सार छंद)-

पाप-पुण्य का लेखा-जोखा, प्रभुवर आप सरेखे ।
 सुपथ-कुपथ पर कर्म करे जब, प्राणी प्राणी को देखे ।
 शक्ति-भक्ति प्रभु हमें दीजिये,  करें कर्म हम जगहित ।
 प्राणी-प्राणी मानव-मानव, सबको समझें मनमित ।।

दीपावली की शुभकामना-

ज्ञान लौ दीप्‍त होकर (रूपमाला छंद)-

दीप की शुभ ज्‍योति पावन,  पाप तम को  मेट ।
 अंधियारा को हरे है,  ज्‍यों करे आखेट ।
 ज्ञान लौ से दीप्‍त होकर,  ही करे आलोक ।
 आत्‍म आत्‍मा प्राण प्राणी,  एक सम भूलोक ।।

दीप पर्व पावन, लगे सुहावन (त्रिभंगी छंद)-

दीप पर्व पावन, लगे सुहावन, तन मन में यह, खुशी भरे ।
 दीपक तम हर्ता, आभा कर्ता, दीन दुखी के, ताप हरे ।।
 जन-जन को भाये, मन हर्शाये, जगमग-जगमग, दीप करे ।
 सुख नूतन लाये, तन-मन भाये, दीप पर्व जब, धरा भरे ।।

बोल रहे हैं दीयें (सार छंद)-

जलचर थलचर नभचर सारे,, शांति सुकुन से जीये ।
 प्रेमभाव का आभा दमके, बोल रहे हैं दीये ।।
 राग-द्वेश का घूप अंधेरा, अब ना टिकने पाये ।
 हँसी-खुशी से लोग सभी अब, सबको गले लगाये ।।

भाईदूज की शुभकामना-

पावन पर्व भाईदूज (राधिका छंद)-

पावन पर्व भाईदूज, दुनिया रिझावे ।
 भाई-बहनों का प्यार, जग को सिखावे ।।
 दुखिया का दोनों हाथ, बहन का भ्राता ।
 यह अति पावन संबंध, जग को सुहाता ।।
-रमेश चौहान