Posted in छंद, साहित्‍य रत्‍न

देेेेशभक्ति का चंदन सजे, नित्‍य हमारे भाल में

देश भक्ति का चंदन सजे, नित्‍य हमारे भाल में

Desh bhakti
Desh bhakti

उल्‍लाल छंद

देश हमारा हम देश के, देश हमारा मान है ।
मातृभूमि ऊंचा स्वर्ग से, भारत का यश गान है ।।

देश एक है सागर गगन एक रहे हर हाल में ।
देश भक्ति का चंदन सजे, नित्य हमारे भाल में ।।

धर्म हमारा हम धर्म के, जिस पर हमें गुमान है ।
धर्म-कर्म जीवन में दिखे,जो खुद प्रकाशवान है ।।

फंसे रहेंगे कब तलक हम, पाखंडियों के जाल में ।
देश भक्ति का चंदन सजे, नित्य हमारे भाल में ।।

जाति हमारी हम जाति के, जिस पर हम को मान है ।।
जाति-पाति से पहले वतन, ज्यों काया पर प्राण है ।।

बटे रहेंगे कब तलक हम, जाति- पाति जंजाल में ।
देश भक्ति का चंदन सजे, नित्य हमारे भाल में ।।

अपने का अभिमान है जब, दूजे का भी मान हो ।
अपना अपमान बुरा लगे जब, दूजे का भी भान हो ।।

फंसे रहेंगे कब तलक हम, नेताओं के जाल में ।
देश भक्ति का चंदन सजे, नित्य हमारे भाल में ।।

देवनागरी लिपि में लिखें, निज हिंदी की शान में ।
मोह दूसरों का छोड़ कर, खुश रहिए निज मान में ।।

देश एक है सागर गगन एक रहे हर हाल में ।
देश भक्ति का चंदन सजे, नित्य हमारे भाल में ।।

-रमेश चौहान
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देशभक्ति कविता- ‘तन मन माँ को कर दो अर्पण’

(चौपाई)

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शहिदों का बलिदान पुकारे ।
यक्ष प्रश्न वे एक विचारे ।।
जन्म-जन्म का मेरा नाता ।
आज दुखी क्यों भारत माता ।।
जागो मेरे जवान बेटो ।
भारत माता का दुख मेटो ।
सोते क्यों हो पैर पसारे
जब छलनी है सीने हमारे ।
कफन बांध हम तो थे रण पर ।
कमर कसो तुम भी इस पल पर ।
तब बैरी अंग्रेज अकेले ।
आज शत्रुओं के दिखते मेले । ।
सीमा के अंदर बाहर हैं ।
बैरी तो सारे कायर हैं ।।
कहीं नक्सली आतंकी हैं ।
कहीं पाक के पातंकी हैं ।।
चीन पाक नापाक इरादे ।
अंदर बाहर इनके प्यादे ।।
आस राजनेता का छोड़ो ।
खुद बैरी के मुख को तोड़ो ।।
वक्त कहां है अब सोने का ।
नहीं वक्त अवसर खोने का ।
धरा तुम्हारी देश तुम्हारे ।
तुम ही माली अरू रखवारे ।।
नश्वर जीवन, शाश्वत कर लो ।
माँ की मिट्टी माथे भर लो ।।
समय नहीं जो देखो दर्पण ।
तन मन माँ को कर दो अर्पण ।
-रमेश चौहान