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छंद साहित्‍य रत्‍न

चौहान के दोहे

चौहान के दोहे
चौहान के दोहे

सफलता के दोहे

1.  मन से काम 'रमेश' कर, कहते है हर कोय ।
मन से गिरि रज होत हैं, सागर कूप स होय ।।

2.  कर्म भाग्‍य का मूल है, कर्म आपके हाथ ।
अपना कर्म 'रमेश' कर, मिले भाग्‍य का साथ ।।

3.  गिर-गिर कर चलना सिखे,  अटक-अटक कर बोल ।
डरना छोड़ 'रमेश' अब,, कोशिश कर दिल खोल ।।

4.  खुले नयन के स्‍वप्‍न को, स्वप्न सलौने मान ।
कर साकार 'रमेश' अब,, मन में पक्का ठान ।।

5.  सीख छुपा है भूल में, कर लो भूल सुधार ।
किए न यत्‍न 'रमेश' यदि, यही तुम्हारी हार ।।

6.  स्वाद 'रमेशा' भूख में, नहीं स्वाद में भूख ।
 भूख जीत की हो अगर, सुनें जीत की कूक ।।

7.  अगर सफल होना तुम्‍हें, लक्ष्‍य डगर संधान ।
 मन के हर भटकाव को, रोक रखो 'चौहान' ।।

8.  अपनी रेखा दीर्घ कर, होगी उसकी छोट ।
 अपना काम 'रमेश' कर, मन में ना रख खोट ।।

9.  कोशिश करो 'रमेश' तुम, कोशिश से ना हार ।
 कोशिश-कोशिश से तुम्‍हें, जीत करेगी प्‍यार ।।

10.  होना सफल 'रमेश' यदि, बुनों योजना एक ।
मान योजना को राह तुम, चले चलों बिन ब्रेक ।।

जवानी के दोहे-

11.  अरे 'रमेशा' युवक तुम, समझ युवक का अर्थ ।
जीवन की बुनियाद तुम, रित ना जावो व्‍यर्थ ।।

12.  अगर 'रमेशा' तुम युवा, रखो जोश में होश ।
देह प्रेम के फेर में, रहो न तुम बेहोश ।।

13.  काम काम के भेद को, ध्‍यान करो 'चाैहान' ।
 काम वासना ही नहीं, काम कर्म की खान ।।

14.  अगर 'रमेशा' पेड़ तुम, बचपन कली बलिष्‍ट ।
जवा-जवानी पुष्‍प है, मधु फल जरा विशिष्‍ट ।।

15.  जीवन पथ यदि वृक्ष हो, आयु युवा है फूल ।
 फूल वृक्ष से टूट कर, बन जाते हैं धूल ।। 

-रमेश चौहान