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गज़ल मुक्‍तक साहित्‍य रत्‍न

गज़ल-या र‍ब जुदा ये तुझसे जमाना तो है नहीं

या रब जुदा ये तुझसे जमाना तो है नहीं
क्यों फिर भी कहते तेरा ठिकाना तो है नहीं

कण कण वजूद है तो तुम्हारा सभी कहे
माने भी ऐसा कोई सयाना तो है नहीं

सुख में भुला पुकारे तुझे दुख में आदमी
नायाब उनका कोई बहाना तो है नहीं

भटके रहे जो माया के पीछे यहीं कहीं
कोई भला खुदा का दिवाना तो है नहीं

लगता मुझे तो खुद का इबादत ही ढोंग सा
अपना भी कोई खास निशाना तो है नहीं

-रमेश चौहान