हिन्‍दी बोल-चाल में अंग्रेजी का बढ़ता प्रभाव

हिन्‍दी बोल-चाल में अंग्रेजी का बढ़ता प्रभाव
हिन्‍दी भाषीय भारतीय यदि बातचीत हिन्‍दी में ही कर रहे होते हैं किन्‍तु उनके हिन्‍दी को सुनकर अंग्रेजी बोलने का आभास होने लगे तो यह हिन्‍दी बोलचाल में अंग्रेजी का बढ़ता प्रभाव ही है ।

भजन-‘संग लिये प्रभु ग्वाल बाल को, करते माखन चोरी’

‘सार छंद में चार पद होते हैं, प्रत्‍येक पद में 16,12 पर यति होता है । दो-दो पदों के अंत में समतुकांत होता है ।’
प्रस्‍तुत भजन में भगवान कृष्‍ण के मनोहर लालित्‍यमयी बालचरित्र का वर्णन सहज सुलभ और सरल भाषा में व्‍यक्‍त किया गया है ।
“संग लिये प्रभु ग्वाल बाल को, करते माखन चोरी ।
मेरो घर कब आयेंगे वो, राह तके सब छोरी ।”

घनाक्षरी छंद का संपूर्ण परिचय, घनाक्षरी छंद लिखना सीखें

घनाक्षरी उपरोक्त नियमों के आधार पर लिखा जा सकता है किन्तु इसके लिये हमें वर्ण की गणना करना और वर्ण में लघु गुरू का निर्धारण करने आना चाहिये । इसलिये सबसे पहले हम वर्ण को समझने का प्रयास करेंगे फिर वर्ण लघु-गुरू का निर्धारण करना देखेंगे तत्पष्चात षब्दों में वर्णो की गणना करना सीखेंगे अंत में घनाक्षरी लिखना जानेंगे ।

हिन्‍दी साहित्‍य में क्षेत्रीय बोली-भाषाओं का योगदान

बोली और उपभाषा की अनेक ऐसी रचनाएं हैं, जिनके बल पर हिन्दी को आजअंतर्राष्‍ट्रीय पहचान प्राप्त हुआ । निष्‍कर्ष रूप से कहा जा सकता है कि निश्चित रूप से हिन्दी को उनके सहगामी बोलियां समृद्ध बनाने में सदा से महत्वपूर्ण योगदान देते आ रही हैं ।