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कोराना पर कुण्‍डलियॉं

कोराना पर कुण्‍डलियॉं
घृणा रोग से कीजिये, रोगी से तो नाहिं ।
रोगी को संबल मिलत, रोग देह से जाहिं ।
रोग देह से जाहिं, हौसला जरा बढ़ायें ।
देकर हिम्‍मत धैर्य, आत्‍म विश्‍वास जगायें ।।
सुन लो कहे रमेश, जोड़ भावना लोग से ।
दें रोगी को साथ, घृण हो भले रोग से ।।

रामचरितमानस के 108 महत्वतपूर्ण दोहे

राम चरित मानस के 108 महत्‍वपूर्ण दोहे
रामचरितमानस विश्व की प्रसिद्ध कृति है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी की जीवनी होने के साथ-साथ एक मानवतावादी पुरुष का कर्म प्रधान चित्रण है। इस कर्म-ज्ञान सम्रद्र से कुछ बूँदे मोती के रूप में प्रस्‍तुत करने का प्रयास है-

आई होली आई होली

आई होली आई होली, मस्ती भर कर लाई ।
झूम झूम कर बच्चे सारे, करते हैं अगुवाई ।

बच्चे देखे दीदी भैया, कैसे रंग उड़ाये ।
रंग अबीर लिये हाथों में, मुख पर मलते जाये ।
देख देख कर नाच रहे हैं, बजा बजा कर ताली ।
रंगो इनको जमकर भैया, मुखड़ा रहे न खाली ।
इक दूजे को रंग रहें हैं, दिखा दिखा चतुराई ।


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